अगर पाकिस्तान में हसन निसार जैसे बुद्धिजीवी हो सकते हैं तो भारत में ऐसे कम से कम २, ४ बुद्धिजीवी तो होना ही चाहिए, पाकिस्तानी कट्टरपंथी मुल्ला, उलेमा हसन निसार के विचारों का पुरजोर विरिध करते हैं इसलिए क्यूंकि वो वहां की वास्तविक परिस्थितिओं और धार्मिक कट्टरवाद के कारण रुके पाकिस्तान के सामाजिक, वैश्विक, आर्थिक, वैज्ञानिक, शैक्षणिक और सामरिक विकास के विरोधी हैं.

हसन निसार के अनुसार पाकिस्तान में २ तरह का आतंकवाद है एक शस्त्र आधारित परम कट्टरवाद और दूसरा शाश्त्र आधारित परम कट्टरवाद, दोनों में प्रशिक्षण का माध्यम अलग है परन्तु उद्देश्य एक “दहशतगर्दी”.

हसन निसार के अनुसार ये दुसरे प्रकार का आतंकवाद ज्यादा खतरनाक है जिसके कारण पाकिस्तान का बौद्धिक विकास अवरुद्ध हो चुका है और इसके उत्तरदायी वहां के मुल्ला मोलवी और उलेमा हैं.

मेरे मतानुसार भारत में भी दुसरे प्रकार का आतंकवाद विगत कुछ दशकों से परवान चढ़ रहा है, यहाँ भी कुछ तथाकथित कट्टरवाद समर्थक बुद्धिजीवी लोगों का मानसिक बलात्कार करने में पूरे उत्साह के साथ लगे हुए हैं उदाहरण के तौर पर जाकिर नाइक, अकबर ओवैसी और असाउद्दीन ओवैसी जैसे कट्टरपंथी.

परन्तु सोचने वाली बात ये है के पाकिस्तान और भारत के बीच बहुत बड़ा फर्क है, पाकिस्तान में कट्टरपंथियों की संख्या अधिक है और सारे के सारे भेड़ चाल चलने वालों की जमात है जबकि भारत में अभी भी ऐसे धृतराष्ट्रों की संख्या कम है.

दूसरी और सबसे महत्वपूर्ण बात पाकिस्तान में एक विशेष समुदाय का प्रभुत्व है जो अपनी मनमानी कर सकता है अपने नियम कानून बना सकता है, ये भारतवर्ष है मित्रों यहाँ ऐसा कुछ नहीं है यहाँ हर प्रकार के आतंकवाद का मुहतोड़ उत्तर है.

जाकिर नाइक जैसे वक्ता ये न भूलें के भारत में रहकर अपने कुतर्कों के से वो मुस्लिम बंधुओं को हिन्दुओं के विरुद्ध कम और हिन्दुओं को मुस्लिमो के विरुद्ध ज्यादा कर रहे हैं. देश में अराजकता और धार्मिक विद्वेष फ़ैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं जिसका परिणाम किसी समुदाय या धर्मविशेष के पक्ष और हित में हो न हों परन्तु राष्ट्र के हित में कदापि नहीं हैं.

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