वृन्दावन धाम में मेरी ये दूसरी होली थी. एक वर्ष पूर्व जब मैंने पहली बार होली कन्हैया के साथ खेली तो लगभग सुधबुध खो चुका, बेसुध था, इसलिए नहीं की मैंने किसी मादक पदार्थ का सेवन किया था अपितु बांके बिहारी की मनमोहक छवि ने मोह लिया था.
मैंने तो सिर्फ कन्हैया की मूर्ती रूप छवि देखि और बावरा हो उठा अब समझ आता है की राधा रानी और गोपियों का क्या हाल होगा मनमोहन को साक्षात् देखकर, क्यूँ हर गोपी कन्हाई को पाना चाहती थी, क्यूँ उद्धव जी का ज्ञान का पाठ गोपियों का मोह भंग नहीं कर पाया था, कैसे करता ये मोह उस ईश्वर के लिए था जो सरे संसार की मोहमाया का कर्ता धर्ता है|

वृन्दावन में एक वर्ष पूर्व की मेरी होली अनुभवहीन थी, कुछ चीज़ों का आनंद लेने से चूक गया था पर इस बार नहीं चूका और पूरे उल्लास के साथ होली मनाई.

होलिका दहन के दिन की संध्या को हम मथुरा पहुँच गए थे, सबसे पहले एक विश्रामालय में रुकने का प्रबंध किया फिर थोडा जलपान करके समीप ही होलिका दहन देखने चले गए, होलिकादहन के उपरांत होलिका की परिक्रमा करके पुनः विश्रामालय पहुंचे और विश्राम किया.

तडके ७.०० बजे सज धज के मथुरा से वृन्दावन चल दिए मन में बनके बिहारी के दर्शन का लालच लिए, खूब खेली होली कन्हाई के संग, थोड़ी आराधना और प्रार्थना के पश्चात् वृन्दावन वासिओं के साथ होली खेलने लगे, वैसे तो वृन्दावन की कुञ्ज गलिओं में सिर्फ वहां के स्थानीय निवासी नहीं होते अपितु देश विदेश से आये अन्य दर्शनार्थी, श्रद्धालु और पर्यटक होते हैं लेकिन होली के दिन ये भिन्नता वहां एकता सी लगने लगती है, सारे के सारे सिर्फ कृष्ण की गोपियाँ हो जाते है जो श्री कृष्ण की भक्ति में मग्न होते है|

बांके बिहारी जी के मंदिर के दृश्य की व्याख्या करना लगभग असंभव सा हो जाता है, दृश्य बड़ा ही मनभावन और रंगीन होता है, ऐसा प्रतीत होता है मानो नंदलाल प्रत्येक गोपी के संग होली खेल रहे है, कोई भी उनके प्रेम और आशीर्वाद से अछूता नहीं है, भगवान की असीम अनुकम्पा है और कुछ तो मरा भाग्य भी की एक तो मैंने मनुष्य योनि पाई दूसरा ईश्वर को साक्षात् अनुभव करने का सौभाग्य भी मिलता रहता है|

Vrindawan Holi

वृन्दावन में होली खेल कर हमने गोवर्धन तो की गिरिराज जी (अपभ्रंश- गिर्राज जी) के नाम से भी सुविख्यात है की और प्रस्थान किया, गिरिराज जी के दर्शन कर के कुछ समय गोवर्धन में व्यतीत किया, पहले तो गिरिराज जी से बरसाना जा कर होली खेलने का विचार था लेकिन मुझे ज्ञात था की बरसाना की होली आज के दिन तक समाप्त हो चुकी होती है इसलिए हमने वृन्दावन पुनः वापसी की , वहीँ और होली खेलने का विचार बनाकर वृन्दावन आ गए|

Gopi Krishan @ Giriraj Ji

दिल्ली में रहते कुछ वर्ष ही बीते है लेकिन जितना लगाव जबलपुर में माँ नर्मदा से है, उतना ही यमुना जी से भी हो गया है| कुछ वर्षों तक कार्यालय आते जाते निरंतर यमुना जी के दर्शन का लाभ मिल जाता था, लेकिन विगत कुछ महीनो से स्तःन परिवर्तन के कारण ये संभव नहीं हो पा रहा है लेकिन माँ यमुना के दर्शन का अवसर जहा भी मिलता है मै उसे भुना लेता हूँ, वृन्दावन का कोसी घाट मेरे लिए जैसे माता का आंचल है जहा यमुना जी के चरणों में शांति और प्रेम का अनुभव कर लेता हूँ|

Maa Yamuna @ Vrindavan

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