कहते है बच्चे ईश्वर का रूप होते है, ये बात मैंने मात्र सुनी नहीं है अपितु अनुभव भी की है. यूँ तो मुझे बच्चों से बड़ा ही लगाव है और बचपन से ही अपने छोटे भाई बहनों के साथ बड़ा हुआ हूँ तब वो भी बच्चे थे और मै भी, बचपन की विषम परिस्थितिओं ने बाल्यावस्था का आनंद नहीं लेने दिया इसलिए दूसरे बच्चों में बचपन का गोपी ढूँढता हूँ. छोटे बच्चों के लिए मै कई रिश्तों में बनता हूँ, किसी का बड़ा भैया हूँ तो किसी का चाचा, किसी का मामा तो कोई सीधे नाम लेकर मुझे मित्र बना लेता है.

बच्चों की मित्रता न सिर्फ मनोरंजक होती है अपितु निश्छल और प्रेम प्रतिरूप होती है, मुझे बड़ा अच्छा लगता है जब मेरे बाल मित्र अपनी तोतली जिव्हा से मुझे मेरा नाम लेकर संबोधित करने का प्रयास करते है, कुछ कहना चाहते है और बलहठ से अपने पसंद का कोई काम करवाने की चेष्टा करते हैं.

वर्तमान में एक बहुत सुन्दर बाल देवी ने मेरे जीवन में पदार्पण किया, व्यस्त जीवन में से कुछ समय निकाल कर मै उस बच्ची के साथ व्यतीत कर लेता हूँ, यूँ तो हर बच्चा बहुत सुन्दर होता है पर इस बच्ची में कुछ ख़ास है और खासियत है उस के चेहरे के परवर्तित होते भावो में, कभी चंचल तो कभी गंभीर भाव सहसा ही आकर्षित करते है.

समय बड़ी तेजी से बीत रहा है, कल ये बड़ी हो जाएगी और अपने माता पिता का नाम करने की होड़ में लग जाएगी, राष्ट्र को गौरवान्वित करेगी और इन सब बड़े कामो की उलझन में कुछ चीज़ें भूल जाएगी जैसे की उसका बचपन और उसका ये वर्तमान का दोस्त गोपी, क्युकी उसकी आयु के साथ साथ उसके मित्र भी बदलेंगे और शायद वो मुझ में रूचि न रखे, उसे मै शायद बूढा लगने लगूं, कोई बात नहीं ये तो प्रकृति का नियम है पर मै नहीं भूलूंगा. मेरा अभी का भविष्य जब आने वाले समय का वर्तमान होगा तब मै आज के वर्तमान में उस के साथ बिताये कुछ पल सुनहरा भूतकाल समझ कर तब भी याद करूँगा.

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