फाल्गुन की बहार है मित्रों, प्रकृति का सोंदर्य आपको सहसा ही मोहित कर लेता है और विशेषकर तब जब आपके हाथ में कैमरा हो और कोई सुंदर पुष्प अचानक आपके सिर पर आकर गिरता है.
मेरी जगह आप होते तो क्या करते मै नहीं जनता पर मैंने उसपुष्प को हमेशा के लिए अपने कैमरे में बंद कर लिया.

ये टेसू का पुष्प एक विशाल वृक्ष से मुझ पर गिरा जब मै तडके दिल्ली की गलिओं में चाय का आनंद ले रहा था.
मैंने इस पुष्प के पालनकर्ता अर्थात वृक्ष को भी कैमरे में बंद करने का प्रयास किया.

ये पोस्ट करते करते अचानक वो गीत याद आ गया जो हम अपने विद्यालय में फाल्गुन के आगमन पर उसके स्वागत में गया करते थे. ये वो गीत है जो हमे हमारी प्यारी शिक्षिका स्वर्गीय मणिका खरे दीदी ने कंठस्थ कराया था. ये पुष्प और और वो सुंदर गीत दोनों दीदी के चरणों में अर्पित है.

फूली सरसों खेत में जी,
भंवर रहे गुंजाल,
देख चना की चौधरी,
मन चाय ख़ुशी अपार !!

लहर फाल्गुन की आवे हो,
रसीला होरी गावे हो,
चहुँ दिशी धूम माचवे हो,
धरा की ओढ़नी बसंती रंग लाल !!

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