जंतर मंतर, जादू टोना, सम्मोहन ये संतों और धर्म गुरुओं के काम नहीं हैं, ये उन लोगो के काम है जो पैसा बनाने की होड़ में लगे है.
धर्म गुरु अर्थ आपके और साक्षात् ईश्वर के बीच की कड़ी, जो आपका संगम आपके हरि से करा देगी वो भी बिना किसी लालच के, अपनी बुद्धि पर जोर डालो और विश्वामित्र से लेकर संदीपनी तक गुरु जनों को याद करो, क्या श्री राम जो की भूपाल है उन्हें गुरु को ज्ञान के बदले कुछ विशेष देना पड़ा था या परमात्मा श्री कृष्ण ने गुरु संदीपनी को कुछ विशेष दिया था?
मित्रों गुरु निश्छल, निस्वार्थ और सज्जन होता है, गुरु ईश्वर का प्रतिनिधि होता है, आज भले ही स्वामी राम कृष्ण परमहंस एवं समर्थ गुरु रामदास न हो जो नरेन्द्र को स्वामी विवेकानंद और शिवा को छत्रपति राजाधिराज महाराजा शिवाजी महाराज बना दे लेकिन ऐसे गुरु है जो आपको कम से कम सत्य का मार्ग दिखा दे.
निस्संदेह गुरु ईश्वर से आपका मिलन करा सकता है, निस्संदेह गुरु आपका तारणहार है पर आज के समय में ऐसा गुरु साक्षात् मिलना भले ही असम्भव ना हो परन्तु अत्यंत कठिन है.

सोचता हूँ की अपने मित्रों और बंधुजनो के अन्धविश्वास पर हंसूं या उन्हें सांत्वना दूँ या फिर उनकी दुर्बुद्धि पर शोक व्यक्त करूँ? मै किसी की अंध श्रद्धा और विश्वास को ठेस नहीं पहुचाना चाहता ना ही उनका मान मर्दन करने का प्रयास कर रहा हूँ जो मेरे मित्र है, परन्तु क्या आप ऐसे किसी बाबा या महाराज पर विश्वास करेंगे जो ईश्वर तक आपकी बात पहुँचाने के लिए २०००/- भारतीय मुद्रा वो भी बैंक चालान के द्वारा ले, आपके अपने गुरु के अनुयायी हैं उन पर आपका बड़ा विश्वास है पर आपके पास पर्याप्त धन नहीं है अपने गुरु को देने के लिए तो उसकी कृपा आप पर नहीं बनेगी.

एक व्यक्ति जो पहले कोई व्यापारी था, अचानक से ये दावा करता है की उसकी छठी इन्द्री जाग्रत हो गई है वो भी बिना किसी योग बल और तप के और अचानक लोगो को अपनी और आकर्षित करने लगता है, ये दावा करता है की अपने स्थान पर बैठे बैठे किसी को भी सम्मोहित कर सकता हूँ और दुनिया से एड्स, कैंसर और अन्य घातक बीमारियों का इलाज कर सकता हूँ, मै सिर्फ ये जानना चाहता हूँ की अगर तुम सच में धर्मं गुरु हो, निस्वार्थ हो जन कल्याण की भावना रखते हो तो ये बताओ की उन लोगों का उपचार क्यों नहीं करते जो तुम्हारे संगम का शुल्क दे पाने में अक्षम है.
अगर तुम में इतनी शक्ति है और तुम ईश्वर के प्रतिनिधि हो तो बिना किसी स्वार्थ के संपूर्ण भारत वर्ष को रोग मुक्त कर दो, भारत में कोई अपंग, कैंसर रोगी, एड्स रोगी ना बचे या किसी को भी कोई रोग ना हो, कोई बेचारा नवजात या तनिक बड़ा शिशु पोलियो का शिकार ना हो.
अगर तुम में इतनी शक्ति है तो कर लो प्रधानमंत्री को सम्मोहित और उस से भ्रष्टाचार ख़तम करवालो, सारा कला धन वापस भारत में माँगा लो जिस से राष्ट्र का कल्याण हो सके.

कोई बताये की संगम की फीस नकद क्यों नहीं, सिर्फ बैंक चालान ही क्यूँ? क्या इस से फीस का रिकॉर्ड रखने में आसानी होती है या काला धन सफ़ेद करने का तरीका है? जी हाँ यह वास्तव में काला धन सफ़ेद करने का ही तरीका है, आश्रम और ट्रस्ट के नाम पर चालान के द्वारा भुगतान का लेखा जोखा सफ़ेद धन में परिवर्तित करने में आसानी जाती है, यूँ तो सरकार की नजर आप पर होती है लेकिन कुछ कर नहीं सकती.

अच्छा एक प्रश्न अंधभक्तों से – अगर आपका बाबा आपसे या दुनिया से दावा करता है की मै किसी से भी कभी भी छठी इन्द्री के द्वारा संपर्क कर सकता हूँ तो फिर आप से सिर्फ इलेक्ट्रोनिक मीडिया के द्वारा ही क्यों मिलता है, “जैसे शक्तिमान टेलीपेथी के द्वारा पत्रकार गीता से बात करता था वैस ये तुम्हारी प्रार्थना या सन्देश नहीं सुन सकता?”

ऐसी बहुत सी बातें है जो मेरे मित्रों तक पहुंचना आवश्यक है पर मेरी भी टाइप करने की सीमा है, वैसे तो सच का सामना इस से ज्यादा करा सकता हूँ लेकिन चाहता हूँ की मेरे साथ ही तुम लोग भी पढ़े हो और वाही शिक्षा तुमने भी पाई है तो मुझे मिली फिर ऐसी मूर्खता क्यूँ ?

समय है चेत जाओ, अन्यथा पैसा भी तुम्हारा है समय भी तुम्हारा और जीवन भी, मैंने मित्र धर्मं निभाने का प्रयास किया और आगे भी करता रहूँगा लेकिन एक सीमा तक.

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