मेरी दैनन्दिनी का पहला पन्ना मेरे इष्ट को समर्पित, धरती माता को समर्पित, भारत माता को समर्पित और समर्पित मेरे आदर्श मेरे पिता को.

मुझे विचारों को व्यक्त करने का एक ही तरीका मालूम है, लिख दूँ जहाँ जगह मिले, क्यूंकि वाचालता मेरे स्वाभाव में नहीं है इस लिए लिख देता हूँ. लिखने का मेरा उद्देश्य बस अपने दैनिक वृतांतों को एक स्थान पर संजो के रखना है.
दिन भर में क्या देखा, कौन सी घटना ह्रदय छू गई और किस घटना ने व्यथित कर दिया सब याद रखना चाहता हूँ, मै कहा गया, क्या देखा, क्या अच्छा लगा क्या बुरा सब लिखना चाहता हूँ, बस इसी उद्देश्य से अपनी दैनन्दिनी के पहले पन्ने का श्री गणेश करता हूँ।

विशेष रूचि –

हिंदी काव्य
यात्रा भ्रमण
फोटोग्राफी
भारतीय संगीत

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